आज आपको एक लाभकारी उपाय बताता हूं जो पूर्णरूप से ज्योतिष ओर आध्यात्म पर आधारित है। यह चंद्र दोष के प्रभाव को कम करता है |

जब किसी भी जातक की जन्म कुंडली मे शनि+चंद्र (विष योग हो) या राहु+चंद्र (ग्रहण दोष) हो तो आप शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को चांदी का एक स्वस्तिक बनवाकर लाल रंग के धागे में पिरोकर गले मे बांध लें।
बांधने से पहले शिव मंदिर में जाकर इसे शिवलिंग के सम्मुख रखकर पंचामृत से धोये ।
फिर गंगाजल से साफ करके कम से कम 11 बार ॐ सोमेश्वराय नमः का जाप करे।
धूप दीप दिखाकर गले मे बांध ले।
तत्काल लाभ मिलेगा करके देखे।
कारण क्या है ?

शनि को शिव माना गया है एवं  चंद्र शिवजी के मस्तक पर विराजमान है।

चंद्रमा मन का कारक है जितने भी विचार से सब चंद्रमा की ही देन है।

चांदी चंद्र की कारक वस्तु है,चतुर्थी गणेश जी की प्रिय तिथि है एवम चंद्र भी गणेश जी मस्तक पर विराजमान है तभी तो गणेश जी को भालचंद्र कहा गया है।

गणेश बुद्धि के प्रदाता है |
शिव और गणेश के आशीर्वाद से जातक को मानसिक पीड़ा अनावश्यक विचार नही आएंगे एवं जातक डिप्रेशन का शिकार नही होगा।

राहु शिव का परम भक्त है जो शिव की कृपा से किसी का अनिष्ट नही कर सकता|

शुभमस्तु।आप सभी का कल्याण हो|

-पंडित विशाल दयानंद शास्त्री, उज्जैन 9039390067

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