आज का बड़ा मंगल बेहद खास, जानें पूजा विधि, महत्व और मंत्र
उत्तर भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत में रचे-बसे 'बड़ा मंगल' के पावन पर्व की धूम आज चहुंओर दिखाई दे रही है। ज्येष्ठ माह के पहले मंगलवार को 'बुढ़वा मंगल' के रूप में अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है, जो पवनपुत्र हनुमान के वृद्ध स्वरूप और उनकी असीमित शक्ति का प्रतीक है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में इस दिन का आध्यात्मिक महत्व देखते ही बनता है, जहां भक्त अपने आराध्य की कृपा पाने के लिए व्रत रखते हैं और भंडारों के माध्यम से सेवा कार्य करते हैं। आज के दिन शिव और सिद्ध जैसे मंगलकारी योगों का मिलन हो रहा है, जो साधकों के जीवन से ग्रहों के अशुभ प्रभाव को समाप्त कर सौभाग्य के द्वार खोलने वाला माना जा रहा है।
दिव्य राजयोगों का महासंगम और आध्यात्मिक महत्व
वर्ष 2026 का यह पहला बड़ा मंगल खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत दुर्लभ संयोग लेकर आया है। आज के दिन न केवल शिव और सिद्ध योग विद्यमान हैं, बल्कि शुक्र के स्वराशि में होने से 'मालव्य राजयोग' और सूर्य-बुध की युति से 'बुधादित्य योग' का निर्माण हो रहा है। इन शुभ घड़ियों में की गई हनुमान चालीसा की चौपाइयां और बजरंगबली का ध्यान भक्तों को बुरी शक्तियों से सुरक्षा कवच प्रदान करता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ के इन मंगलवारों को हनुमान जी की पूजा करने से आध्यात्मिक चेतना जागृत होती है। भक्तों का विश्वास है कि जो भी सच्चे मन से बुढ़वा मंगल का उपवास रखता है, उसे न केवल मानसिक शांति मिलती है बल्कि संकटमोचन उसके जीवन के समस्त अवरोधों को हर लेते हैं।
आठ बड़े मंगल का विशेष संयोग और तिथियां
पंचांग की गणना के अनुसार, इस वर्ष अधिक मास होने के कारण ज्येष्ठ के महीने में कुल 8 बड़े मंगल का अद्भुत अवसर प्राप्त हो रहा है। मई और जून के महीनों में पड़ने वाले ये सभी मंगलवार भक्तों के लिए हनुमान जी की विशेष आराधना का द्वार खोलेंगे। आज 5 मई को पहले बड़े मंगल के बाद, आगामी 12, 19 और 26 मई को क्रमशः दूसरा, तीसरा और चौथा बड़ा मंगल मनाया जाएगा। इसके पश्चात जून के महीने में 2, 9, 16 और 23 तारीख को शेष चार बड़े मंगल पड़ेंगे। इतनी अधिक संख्या में बड़ा मंगल का आना भक्तों के लिए भक्ति और शक्ति के संचय का एक सुनहरा काल माना जा रहा है, जिसमें निरंतर साधना से प्रभु को प्रसन्न किया जा सकता है।
शास्त्रोक्त पूजा विधान और कल्याणकारी मंत्र
हनुमान जी की पूजा के लिए संध्या काल को सर्वोत्तम माना गया है, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि दिन के समय वे अपने आराध्य भगवान श्री राम की सेवा में लीन रहते हैं। पूजा के लिए सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेकर शाम को मंदिर या घर के स्वच्छ स्थान पर बजरंगबली की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए। भगवान को सिंदूर, चोला, चमेली का तेल और विशेष रूप से गुड़-चना व बूंदी का भोग लगाना अत्यंत प्रिय है। श्रद्धापूर्वक चमेली के तेल का दीपक प्रज्वलित कर 'ॐ हं हनुमते नमः' और 'श्री तं दूताय नमः' जैसे प्रभावशाली मंत्रों का जाप करना चाहिए। पूजन के अंत में राम नाम का संकीर्तन और हनुमान चालीसा का पाठ करने से साधक को अतुलनीय बल और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
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