कृष्णम बोले- पाकिस्तान प्रेम के कारण नहीं बोलेंगे वंदे मातरम
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के मदरसों में 'वंदे मातरम' गाना अनिवार्य किए जाने के फैसले के बाद देश का सियासी पारा चढ़ गया है। इस फैसले की गूंज अब उत्तर प्रदेश तक सुनाई दे रही है, जहाँ समाजवादी पार्टी (सपा) और अन्य विपक्षी नेताओं ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है। वहीं, दूसरी ओर इस विरोध पर पलटवार करते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि कुछ नेताओं का दिल हमेशा पाकिस्तान के लिए धड़कता है, इसलिए वे वंदे मातरम बोलने से कतराते हैं।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक नया सरकारी आदेश जारी किया। इस आदेश के तहत राज्य के सभी मदरसों को यह निर्देश दिया गया है कि अब से सुबह की प्रार्थना के समय राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' का गायन अनिवार्य होगा। पश्चिम बंगाल के साथ-साथ उत्तर प्रदेश सरकार भी पहले से ही शैक्षणिक संस्थानों में इस पर विशेष ज़ोर दे रही है।
राष्ट्रभक्ति जबरदस्ती नहीं थोपी जा सकती: जियाउर्रहमान बर्क
इस नए नियम को लेकर जब उत्तर प्रदेश के संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इस फैसले का खुलकर विरोध किया। बर्क ने कहा कि किसी से जबरदस्ती कोई शब्द बुलवाकर उसकी देशभक्ति साबित नहीं की जा सकती। उन्होंने साफ किया कि देश का हर नागरिक और मुस्लिम समुदाय राष्ट्रगान (जन गण मन) का पूरा सम्मान करता है और मुस्लिमों को बार-बार अपनी देशभक्ति का प्रमाण देने की कोई जरूरत नहीं है।
सपा सांसद ने आगे कहा कि देश के प्रति अपनी वफादारी और मोहब्बत दिखाने के लिए किसी खास शब्द को बोलना जरूरी नहीं होता, बल्कि वक्त आने पर हर कोई अपनी वफादारी साबित करता है। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर सरकार यह सोचती है कि कुछ विशेष शब्दों को बोलने से ही कोई वफादार कहलाएगा, तो ऐसी मंशा पर उन्हें बेहद अफसोस है।
राष्ट्रगीत के शब्दों पर है मतभेद
सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि देश के राष्ट्रगीत (वंदे मातरम) को लेकर शुरू से ही अलग-अलग मतभेद रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि राष्ट्रगीत एक ऐसा गीत है जिस पर संविधान सभा के गठन के समय भी कई सदस्यों ने आपत्ति जताई थी। बर्क ने स्पष्ट किया कि उन्हें या उनके समुदाय को अपने देश (राष्ट्र) से कोई आपत्ति नहीं है, बल्कि इस गीत की कुछ लाइनों और शब्दों से ऐतराज है, जिसके कारण इसे अनिवार्य बनाना सही नहीं है।
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