प्रशासन की शह या ठेकेदार की दबंगई? मऊगंज बस स्टैंड पर नियमों को ताक पर रखकर बस चालकों से की जा रही अवैध वसूली
मऊगंज | जिला मुख्यालय के नगर परिषद क्षेत्र में सिंचाई विभाग की भूमि पर संचालित हो रहे अस्थाई बस स्टैंड पर अवैध रूप से राशि वसूलने का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। आश्चर्य की बात यह है कि जहां यह पूरा खेल चल रहा है, उसके बिल्कुल समीप ही नगर परिषद का कार्यालय स्थित है, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी इस पूरे घटनाक्रम से पूरी तरह आंखें मूंदे बैठे हैं। स्थानीय स्तर पर मिल रही जानकारी के मुताबिक, नगर परिषद ने केवल 'बाजार बैठकी' का ठेका आवंटित किया था, परंतु इसकी आड़ में बस स्टैंड पर आने-जाने वाले बस ऑपरेटरों और अन्य वाहन चालकों से भी जबरन अवैध वसूली की जा रही है।
नियमों को ताक पर रखकर वसूली और अभद्रता
बस संचालकों का सीधा आरोप है कि पार्किंग अथवा बस स्टैंड शुल्क वसूलने का वर्तमान में कोई पृथक टेंडर जारी नहीं किया गया है, फिर भी बाजार बैठकी के ठेकेदार द्वारा नियमित रूप से बसों से अवैध टैक्स लिया जा रहा है। विरोध करने या पैसे देने से मना करने पर वाहन चालकों और बस ऑपरेटरों को कथित रूप से डराया-धमकाया जाता है और उनके साथ भद्दी गालियां व अभद्र भाषा का प्रयोग किया जाता है। इतने संवेदनशील मामले में नगर परिषद प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे इस खेल ने पूरी व्यवस्था पर उंगलियां उठा दी हैं कि आखिर बिना किसी नियम या वैधानिक आदेश के यह वसूली किसके इशारे पर हो रही है।
सीएमओ की स्वीकारोक्ति और कागजी कार्रवाई
इस पूरे प्रकरण को लेकर जब नगर परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) राहुल शर्मा से बात की गई, तो उन्होंने भी माना कि बस ऑपरेटरों से इस तरह की कोई भी वसूली पूरी तरह गैर-कानूनी और गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस शिकायत के संज्ञान में आने के बाद संबंधित ठेकेदार को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है और पूरे मामले की जांच के बाद उचित कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, इस प्रशासनिक जवाब के बाद स्थानीय लोगों में यह सवाल उठ रहा है कि जब यह कृत्य पूरी तरह अवैध है, तो अब तक केवल नोटिस की औपचारिकता क्यों की गई और दोषियों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
प्रशासनिक साठगांठ की आशंका और सवाल
अस्थाई बस स्टैंड पर खुलेआम चल रही इस अवैध वसूली ने मऊगंज नगर परिषद की कार्यशैली और उसकी प्रशासनिक मॉनिटरिंग को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है। क्षेत्र के नागरिकों और वाहन चालकों का कहना है कि परिषद परिसर से महज कुछ ही दूरी पर चल रहे इस अवैध धंधे को निश्चित तौर पर किसी न किसी का मौन संरक्षण प्राप्त है। अब जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि स्थानीय प्रशासन इस मामले में केवल नोटिस जारी करने जैसी कागजी खानापूर्ति करके बैठ जाता है या फिर अवैध वसूली करने वाले तत्वों के खिलाफ कोई कड़ी दंडात्मक कार्रवाई कर अपनी छवि को साफ करता है।
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