फादर्स डे पर दिल दहला देने वाली घटना, 7 साल के बच्चे की डूबने से मौत
धार। फादर्स डे के विशेष दिन एक अभागे पिता को जीवन का सबसे असहनीय और क्रूर जख्म मिला है। धार जिले के धामनोद थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले खलघाट नर्मदा घाट पर रविवार को एक 7 वर्षीय मासूम बच्चे कृष्णा की नदी के गहरे पानी में डूबने से असामयिक मौत हो गई। जिस पिता ने बड़े लाड-प्यार से उंगली पकड़कर अपने कलेजे के टुकड़े को चलना सिखाया था, उसी की आंखों के सामने मासूम ने हमेशा के लिए दम तोड़ दिया। इस हृदयविदारक घटना के बाद से पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
पीथमपुर से नर्मदा दर्शन के लिए पहुंचा था परिवार
मूल रूप से हरदा जिले के ग्राम छोटा देवास के निवासी रामशंकर वर्तमान में पीथमपुर की एक निजी औद्योगिक कंपनी में कार्यरत हैं। रविवार 21 जून को साप्ताहिक अवकाश होने के कारण, वे अपने ममेरे भाई अश्विन चौहान और अपने दो पितातुल्य मासूम बेटों— 7 वर्षीय कृष्णा उर्फ रमन और 5 वर्षीय नारायण के साथ सुबह लगभग 11 बजे खलघाट स्थित नर्मदा नदी के दर्शन और पवित्र स्नान के लिए पहुंचे थे।
नदी किनारे मछलियों को दाना खिलाते समय हुआ हादसा
शोक संतप्त परिजनों ने रुआंसे स्वर में बताया कि घाट पर स्नान करने के बाद मासूम कृष्णा नदी के किनारे अठखेलियां कर रही मछलियों को दाना खिला रहा था। इसी दौरान अचानक घाट की सीढ़ियों पर काई या नमी के कारण उसका पैर फिसल गया और वह संतुलन खोकर सीधे नदी के गहरे पानी में समा गया। बच्चे को डूबता देख परिजनों ने आनन-फानन में खुद करीब 10-15 मिनट तक पानी में उसकी खोजबीन की, लेकिन गहरे बहाव के कारण सफलता नहीं मिली। इसके बाद तुरंत आपातकालीन पुलिस हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दी गई।
20 मिनट तक दिया गया सीपीआर (CPR), अस्पताल में डॉक्टरों ने तोड़ा दम
नर्मदा घाट पर तैनात आपातकालीन सुरक्षा टीम और स्थानीय गोताखोरों ने सूचना मिलते ही तत्परता से रेस्क्यू ऑपरेशन (सर्चिंग) शुरू किया। कुछ ही समय में बच्चे को नदी के किनारे से अचेत अवस्था में बाहर निकाला गया। पानी से बाहर लाते ही ड्यूटी पर तैनात आरक्षक दीपक मंडलोई और बेबस पिता रामशंकर ने बच्चे के फेफड़ों से पानी निकालने और सांसें वापस लाने के लिए करीब 20 मिनट तक लगातार सीपीआर (CPR) दिया। इसके बाद उसे तुरंत एम्बुलेंस से धामनोद के शासकीय अस्पताल ले जाया गया, जहाँ ड्यूटी डॉक्टरों ने गहन परीक्षण के बाद कृष्णा को मृत घोषित कर दिया।
अस्पताल में पसरा सन्नाटा, समझाइश के बाद हुआ पोस्टमार्टम
इकलौते मासूम बेटे का शव देखकर पिता रामशंकर बदहवास हो गए। गहरे सदमे के कारण उन्होंने शुरुआत में शव का पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार कर दिया। इसी बीच हादसे की खबर मिलते ही पीथमपुर से रोती-बिलखती मासूम की मां भी धामनोद अस्पताल पहुंच गई। परिजनों के विलाप से पूरा अस्पताल परिसर गमगीन हो उठा। लगभग 5 घंटे तक स्थानीय वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और प्रबुद्ध जनों ने पीड़ित माता-पिता को ढांढस बंधाया और विधिक प्रक्रियाओं की अनिवार्यता समझाई। अंततः सबकी समझाइश के बाद परिजन राजी हुए, जिसके बाद डॉक्टर जगदीश देवड़ा ने शव का पोस्टमार्टम कर उसे अंतिम संस्कार के लिए माता-पिता को सौंप दिया।
सामाजिक सहयोग से पैतृक गांव हरदा भेजा गया शव
इस दुखद घड़ी में पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने और सहायता के लिए स्थानीय नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि विष्णु पाटीदार और सामाजिक कार्यकर्ता विशाल मंडलोई अस्पताल पहुंचे। उन्होंने संकटग्रस्त परिवार की तत्काल आर्थिक मदद की और निजी स्तर पर एक विशेष एंबुलेंस की व्यवस्था कराई, ताकि मासूम के पार्थिव देह को उनके पैतृक निवास स्थान हरदा ले जाया जा सके। फिलहाल, धामनोद थाना पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर घटना के सभी पहलुओं की वैधानिक जांच शुरू कर दी है।
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