मोदी सरकार को मिल सकती है बड़ी ताकत, संसद में दो-तिहाई समर्थन के करीब पहुंची
नई दिल्ली। साल 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद से देश की राजनीति और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर का समीकरण अब पूरी तरह बदल चुका है। चुनाव नतीजों के वक्त जो सरकार पूरी तरह बैसाखियों और सहयोगी दलों के भरोसे नजर आ रही थी, वह हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद लोकसभा में पहले से कहीं अधिक मजबूत और सुरक्षित स्थिति में पहुंच गई है। विपक्ष में हुई बड़ी टूट का सीधा फायदा सत्तापक्ष को मिला है, जिससे सदन के भीतर का पूरा गणित ही बदल गया है।
तृणमूल कांग्रेस में बड़ी टूट और एनडीए का नया समीकरण
चुनाव के तुरंत बाद आंध्र प्रदेश की तेलुगू देसम पार्टी (TDP) अपने 16 सांसदों के साथ एनडीए का सबसे बड़ा सहयोगी दल बनकर उभरी थी। इसके बाद नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (JDU) 12 सांसदों के साथ दूसरे नंबर पर थी। लेकिन पश्चिम बंगाल की राजनीति से उपजे एक अप्रत्याशित घटनाक्रम ने इस पूरे क्रम को बदल दिया। दरअसल, तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने एक साथ पाला बदलते हुए खुद को 'नेशनल सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया' नाम के एक दल में शामिल कर लिया। इस नए गुट ने केंद्र सरकार को अपना समर्थन देने का एलान कर दिया है, जिसके बाद अब यह दल लोकसभा में एनडीए का सबसे बड़ा घटक दल बन चुका है।
महाराष्ट्र की सियासत का असर और शिव सेना का बढ़ता कद
पश्चिम बंगाल के साथ-साथ महाराष्ट्र की राजनीति में मचे घमासान का असर भी दिल्ली के सत्ता गलियारों में साफ देखने को मिल रहा है। चुनाव के वक्त मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिव सेना ने केवल 7 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल की थी। लेकिन हाल ही में उद्धव ठाकरे के गुट से छह सांसदों ने पाला बदलकर शिंदे गुट का दामन थाम लिया। इस बड़े फेरबदल के बाद एकनाथ शिंदे की शिव सेना के पास अब कुल 13 सांसद हो गए हैं। इस जोड़-तोड़ की वजह से अब वह लोकसभा में नीतीश कुमार की जेडीयू से भी बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है।
बहुमत के आंकड़े से बहुत आगे निकला एनडीए का कुनबा
अगर पूरे गणित को समझें तो चुनाव नतीजों के समय भारतीय जनता पार्टी अपने दम पर बहुमत के जादुई आंकड़े (272 सीटें) से 32 सीटें पीछे यानी 240 पर सिमट गई थी। उस वक्त सहयोगियों को मिलाकर एनडीए के पास कुल 293 सीटें थीं और सरकार को हर कदम फूंक-फूंक कर रखना पड़ रहा था। लेकिन विपक्षी खेमे में लगी इस बड़ी सेंधमारी के बाद अब एनडीए का कुल आंकड़ा बढ़कर 319 सांसदों तक पहुंच गया है। चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के 5 सांसदों और अन्य छोटे दलों के साथ मिलकर मोदी सरकार अब लोकसभा में बेहद मजबूत स्थिति में है और उस पर से शुरुआती राजनीतिक दबाव काफी हद तक कम हो गया है।
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