इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने पर सरकार का फोकस, FCI के साथ रॉ मैटेरियल सप्लाई की रणनीति तैयार
नई दिल्ली: देश में पारंपरिक ईंधन यानी पेट्रोल और डीजल के आयात पर निर्भरता घटाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार इथेनॉल मिश्रण (ब्लेंडिंग) कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ा रही है। इस दिशा में एक बड़ा निर्णय लेते हुए सरकार ने इथेनॉल विनिर्माता डिस्टिलरियों को पर्याप्त मात्रा में कच्चा माल उपलब्ध कराने का खाका तैयार कर लिया है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा भारतीय खाद्य निगम (FCI) के बफर स्टॉक से डिस्टिलरियों को रियायती दरों पर चावल आवंटित करने के साथ-साथ ई-नीलामी की प्रक्रिया को भी हरी झंडी दे दी गई है। इस दूरगामी नीति से घरेलू स्तर पर जैव ईंधन के उत्पादन को नया आयाम मिलेगा और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
डिस्टिलरियों के लिए 72 लाख टन चावल का ऐतिहासिक आवंटन
अनाज आधारित इथेनॉल निर्माण को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने आपूर्ति वर्ष 2026-27 हेतु भारतीय खाद्य निगम के भंडार से 72 लाख टन चावल आरक्षित करने का निर्णय लिया है। यह मात्रा पूर्ववर्ती आपूर्ति वर्ष 2025-26 के 52 लाख टन आवंटन की तुलना में काफी अधिक है। इसके अतिरिक्त राइस मिलिंग ट्रांसफॉर्मेशन योजना के तहत उत्पादित 55 लाख टन टूटे (ब्रोकन) चावल को ई-नीलामी के माध्यम से बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा। मंत्रालय द्वारा डिस्टिलरियों के लिए चावल की बिक्री दर ₹2,390 प्रति क्विंटल निर्धारित की गई है, जिससे डिस्टिलरियों को पूरे वर्ष बिना किसी बाधा के कच्चा माल मिलता रहेगा।
ईंधन विपणन कंपनियों की खरीद दर और डिस्टिलरी इकॉनमी
वर्तमान व्यवस्था के अंतर्गत पेट्रोलियम तेल विपणन कंपनियों के लिए एफसीआई के चावल से निर्मित इथेनॉल को ₹58.5 प्रति लीटर की पूर्व-निर्धारित दर से खरीदना अनिवार्य किया गया है, जबकि टूटे चावल से उत्पादित इथेनॉल का क्रय मूल्य ₹64 प्रति लीटर तय है। ई-नीलामी के जरिए उपलब्ध कराए जा रहे शत-प्रतिशत टूटे हुए चावल के उपयोग पर कोई तकनीकी प्रतिबंध न होने से डिस्टिलरियां इसका उपयोग इथेनॉल विनिर्माण में सुगमता से कर सकेंगी। इस कदम से डिस्टिलरी उद्योग की परिचालन लागत में सुधार होगा और उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।
पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य की दिशा में कदम
सरकार पेट्रोल में इथेनॉल के मिश्रण को मौजूदा 20 प्रतिशत के स्तर से आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर गंभीरता से परीक्षण कर रही है। देश में लगभग 2,000 करोड़ लीटर की वार्षिक इथेनॉल निर्माण क्षमता के मुकाबले तेल कंपनियों को 20 फीसदी मिश्रण के लक्ष्य को बनाए रखने के लिए प्रतिवर्ष 1,050 से 1,100 करोड़ लीटर इथेनॉल की जरूरत होती है। मानसून की अनिश्चितताओं के कारण गन्ने और मक्के की पैदावार में होने वाले उतार-चढ़ाव के दौरान केंद्रीय भंडार में मौजूद यह अधिशेष चावल इथेनॉल की अबाध आपूर्ति की गारंटी देगा।
राज्य एजेंसियों हेतु अनाज आवंटन और केंद्रीय दिशा-निर्देश जारी
केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों और उनकी अधिकृत एजेंसियों के लिए भी चावल आपूर्ति के दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसके तहत जुलाई से अक्टूबर अवधि के लिए ₹2,320 प्रति क्विंटल की दर से 16 लाख टन तथा नवंबर 2026 से जून 2027 के मध्य ₹2,390 प्रति क्विंटल की दर से 32 लाख टन चावल आवंटित किया गया है। दूसरी ओर, राष्ट्रीय सहकारी समितियों के माध्यम से 'भारत' ब्रांड के तहत की जाने वाली खुदरा बिक्री के लिए आवंटन को फिलहाल स्थगित रखा गया है, जिसकी संशोधित मात्रा और समय-सारणी शीघ्र ही जारी की जाएगी।
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