जबलपुर: अंतर्धार्मिक विवाहों पर विवाद, हिंदू संगठनों ने कलेक्ट्रेट में सौंपा ज्ञापन; निष्पक्ष जांच की मांग

जबलपुर: जिले में विभिन्न समुदायों के बीच होने वाले विवाहों की एक सूची सामने आने के बाद स्थानीय संगठनों ने कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुँचकर कड़ा विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि ये विवाह नियमों को ताक पर रखकर और परिजनों की जानकारी के बिना किए जा रहे हैं। कलेक्ट्रेट के सूचना पटल पर नौ जोड़ों की सूची चस्पा की गई थी, जिसे लेकर संगठनों ने आपत्ति जताई है।

प्रक्रिया और पारदर्शिता पर उठे सवाल

विरोध कर रहे प्रतिनिधियों का दावा है कि विवाह के लिए जारी होने वाले आधिकारिक नोटिस संबंधित युवतियों के घर तक नहीं पहुँच पा रहे हैं। उनका आरोप है कि यह एक सुनियोजित प्रयास है जिसमें पारदर्शिता का अभाव है। संगठनों ने मांग की है कि इन मामलों की पूरी पड़ताल होने तक विवाह की अनुमति न दी जाए।

कानूनी विशेषज्ञों की राय और नियम

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के अधिवक्ता विवेक तिवारी ने भी इस मामले में कलेक्टर के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'विशेष विवाह अधिनियम 1954' और 'मध्य प्रदेश धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2020' के तहत विवाह से पूर्व सत्यापन और सूचना की प्रक्रिया अनिवार्य है। उन्होंने आशंका जताई कि इन मामलों में प्रलोभन या दबाव का तत्व शामिल हो सकता है, जिसकी गहन जांच आवश्यक है।

प्रशासन और पुलिस मुस्तैद

संभावित तनाव को देखते हुए जबलपुर पुलिस और जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। आज एक जोड़े के कलेक्ट्रेट पहुँचने की सूचना पर परिसर में सुरक्षा बल तैनात किया गया है। डिप्टी कलेक्टर रघवीर सिंह मरावी ने जानकारी दी कि कुल नौ विवाहों पर आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। उन्होंने आश्वासन दिया है कि प्रशासन दोनों पक्षों से विस्तृत चर्चा और जांच के बाद ही कानून सम्मत निर्णय लेगा।

आपत्ति के दायरे में आए नाम

प्रशासन को सौंपी गई सूची में शामिल जोड़े इस प्रकार हैं:

  • मोहम्मद शफीक अंसारी और नेहा रैकवार

  • समीर खान और प्रियंका चौधरी

  • फिरोज खान और शिवानी चौधरी

  • इब्राहिम दाऊद और अंजना दुबे

  • तौसीक अंसारी और मोहिनी चौधरी

  • मोहम्मद अजहर खान और इशा नामदेव

  • साहुल इब्राहिम और विधि महावर

  • शेख इरफान और निधि सांधिया

  • इनमोनी फिलिस और महक भारद्वाज