ओसवाल पंप्स का IPO आज से खुला: रिटेल निवेशकों के लिए मौका, GMP ₹65-71, ₹1387 करोड़ जुटाने का लक्ष्य।
ओसवाल पंप्स लिमिटेड का बहुप्रतीक्षित IPO आज, 13 जून 2025 से सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया है. कंपनी ने इस IPO के जरिए 1387 करोड़ रुपये जुटाने का टारगेट रखा है, और इसकी शुरुआत भी धमाकेदार हुई है. कंपनी ने पहले ही एंकर इन्वेस्टर्स से 416.2 करोड़ रुपये की फंडिंग जुटा ली है.
ओसवाल पंप्स का IPO आज यानी 13 जून 2025 से 17 जून 2025 तक खुला रहेगा. मतलब, आपके पास चार दिन हैं इस IPO में बोली लगाने के लिए. अगर आप इसमें निवेश करना चाहते हैं, तो आपको कम से कम 24 शेयरों के लिए बोली लगानी होगी. अगर आप इससे ज्यादा शेयर लेना चाहते हैं, तो 24 के गुणक में बोली लगा सकते हैं. यानी, 24, 48, 72, इस तरह. कंपनी ने शेयर का प्राइस बैंड 584 रुपये से 638 रुपये प्रति शेयर तय किया है. मतलब, आपको एक शेयर के लिए कम से कम 584 रुपये और ज्यादा से ज्यादा 638 रुपये चुकाने होंगे.
कितना पैसा जुटाएगी कंपनी?
कंपनी इस IPO के जरिए कुल 1387 करोड़ रुपये जुटाने की प्लानिंग कर रही है. इसमें से 890 करोड़ रुपये फ्रेश इक्विटी के जरिए आएंगे, यानी कंपनी नए शेयर जारी करेगी. इसके अलावा, कंपनी के प्रमोटर विवेक गुप्ता 81 लाख शेयरों की बिक्री ऑफर फॉर सेल (OFS) के तहत करेंगे. ये रकम कंपनी के बिजनेस को और मजबूत करने, नई टेक्नोलॉजी में निवेश करने और प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाने में इस्तेमाल होगी.
GMP का क्या है सीन?
अब बात करते हैं ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) की, जो IPO की लिस्टिंग से पहले निवेशकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. प्राइमरी मार्केट में ओसवाल पंप्स के IPO का GMP 68 रुपये पर ट्रेंड कर रहे हैं.
अगर इसे प्राइस बैंड के औसत 614 रुपये के साथ जोड़ा जाए, तो अनुमान है कि शेयर की लिस्टिंग 682 रुपये प्रति शेयर के आसपास हो सकती है. यानी, सेकेंडरी मार्केट में ये शेयर 11 फीसदी के प्रीमियम के साथ लिस्ट हो सकता है. हालांकि ये ये बाजार की चाल पर निर्भर करता है, लेकिन फिलहाल GMP को देखकर निवेशकों में उत्साह है.
रिटेल निवेशकों के लिए सुनहरा मौका
अगर आप छोटे निवेशक हैं, यानी रिटेल इन्वेस्टर, तो ये IPO आपके लिए शानदार मौका लेकर आया है. ये IPO बुक बिल्डिंग प्रोसेस पर आधारित है, यानी शेयरों का अलॉटमेंट बोली के आधार पर होगा. अब हिस्सेदारी की बात करें, तो इसमें 50 फीसदी हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए रिजर्व है. 15 फीसदी हिस्सा नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) के लिए रखा गया है, और बाकी 35 फीसदी हिस्सा रिटेल निवेशकों के लिए है. यानी, छोटे निवेशकों को इसमें अच्छा-खासा मौका मिल रहा है.
कौन है ओसवाल पंप्स?
अब थोड़ा कंपनी के बारे में जान लेते हैं. ओसवाल पंप्स की शुरुआत साल 2003 में हुई थी. उस वक्त कंपनी ने लो-स्पीड मोनोब्लॉक पंप्स बनाना शुरू किया था. धीरे-धीरे कंपनी ने अपने प्रोडक्शन को बढ़ाया और आज ये कई तरह के प्रोडक्ट्स बनाती है. इनमें सोलर पावर्ड और ग्रिड-कनेक्टेड सबमर्सिबल पंप्स, मोनोब्लॉक पंप्स, इलेक्ट्रिक मोटर्स और सोलर मॉड्यूल्स शामिल हैं. यानी, कंपनी का फोकस रिन्यूएबल एनर्जी और एग्रीकल्चर से जुड़े प्रोडक्ट्स पर है, जो आज के समय में काफी डिमांड में हैं.
कंपनी का बिजनेस मॉडल
ओसवाल पंप्स का बिजनेस मॉडल काफी मजबूत है. कंपनी का फोकस सोलर और इलेक्ट्रिक पंप्स पर है, जो खेती-किसानी और इंडस्ट्रियल सेक्टर में खूब इस्तेमाल होते हैं. सोलर पावर्ड पंप्स की डिमांड तो आजकल आसमान छू रही है, क्योंकि ये पर्यावरण के लिए भी अच्छे हैं और बिजली का बिल भी बचाते हैं. कंपनी ने पिछले कुछ सालों में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को अपग्रेड किया है और नए-नए प्रोडक्ट्स लॉन्च किए हैं. इसके अलावा, कंपनी का डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क भी काफी मजबूत है, जो इसे मार्केट में और मजबूती देता है.
मार्केट एक्सपर्ट्स का क्या कहना है?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि ओसवाल पंप्स का IPO लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर्स के लिए अच्छा हो सकता है. कंपनी का बिजनेस मॉडल फ्यूचर-ओरिएंटेड है, और सोलर एनर्जी की बढ़ती डिमांड को देखते हुए इसका ग्रोथ पोटेंशियल भी अच्छा है. हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेशकों को प्राइस बैंड के ऊपरी हिस्से यानी 638 रुपये पर बोली लगाने से पहले थोड़ा सोच-विचार करना चाहिए. अगर मार्केट में कोई बड़ा उलटफेर हुआ, तो लिस्टिंग पर असर पड़ सकता है.
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